October 21, 2021



भारत मे हुये अब तक के बड़े किसान आंदोलन का इतिहाश

किसान आंदोलन का इतिहाश
किसान आंदोलन का इतिहाश
भारत मे हुये अब तक के बड़े किसान आंदोलन का इतिहाश 1

भारत का अन्नदाता किसान एक बार फिर से सड़क पर है। केंद्र सरकार द्वारा लाए गए नए कृषि कानूनों के खिलाफ किसान सड़क पर उतरने को मजबूर है। किसानों को डर है कि नए कानूनों से मंडिया खत्म हो जाएंगे। साथ ही न्यूनतम समर्थन मूल्य यानि की MSP पर होने वाली खरीदी भी रुक जाएगी। दूसरी ओर सरकार का कहना है कि MSPपर खरीदी बंद नहीं होगी। यूं तो अलग-अलग राज्यों में किसान अपने आंदोलनों के जरिए सरकार के खिलाफ खड़े होते रहे।

इन आंदोलनों से सत्ता के शिखर हिलते रहे हैं और गिरते भी रहे हैं। वर्तमान आंदोलन की बात करें तो पंजाब से उठी चिंगारी से अब पूरा देश बदल रहा है। हरियाणा राजस्थान महाराष्ट्र, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, पश्चिम बंगाल, आंध्र प्रदेश और बिहार समेत देश के अन्य हिस्सों में भी किसान सड़कों पर उतर आए हैं। दिल्ली को तो मानो चारों ओर से आंदोलनकारी किसानों ने घेर लिया है। आज हम बात करेंगे भारतीय इतिहास में कुछ महत्वपूर्ण किसान आंदोलनों के बारे में ।

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भारत को मिला एक बड़ा किसान नेता

किसान नेता राकेश टिकैत के पिता महेंद्र सिंह टिकैत की पहचान भी किसान आंदोलन के कारण ही थी और वह देश के सबसे बड़े किसान नेता माने जाते थे। चौधरी चरण सिंह और चौधरी देवीलाल भी किसान नेता थे, लेकिन उनकी अपनी राजनीतिक पार्टियां भी थी, जबकि महेंद्र सिंह टिकैत विशुद्ध किसान नेता थे।

दरअसल 1987 में पश्चिमी उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर के खेड़ी गांव में बिजली घर जलने से किसान बिजली संकट का सामना कर रहे थे। 1 अप्रैल 1987 को इन्हीं किसानों में से एक महेंद्र सिंह टिकैत ने सभी किसानो से बिजलीघर के घेराव का आह्वान किया। यह वह दौर था जब गांव में मुश्किल से बिजली मिल पाती थी। ऐसे ही देखते ही देखते लाखों किसान जमा हो गए। इसका अंदाजा खुद टिकैत को भी नहीं था। किसानों को इसके बाद टिकैत के रूप में एक बड़ा किसान नेता मिल गया। उन्हें लगा कि वह एक बड़ा आंदोलन भी कर सकते हैं।

भारत मे हुये अब तक के बड़े किसान आंदोलन

जनवरी 1988 में किसानों ने अपने नए संगठन भारतीय किसान यूनियन के झंडे तले मेरठ में 25 दिनों का धरना आयोजित किया। उस समय इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी चर्चा मिली थी। इसमें पूरे भारत के किसान संगठन और नेता शामिल हुए किसानों की मांग थी कि, सरकार उनकी उपज का दाम वर्ष 1967 से तय करें। सबसे खास बात यह थी कि टिकैत एक non-political किसान नेता थे।

उन्होंने कभी भी कोई राजनीतिक दल नहीं बनाया। महेंद्र सिंह टिकैत के आंदोलन के कारण उस समय के राजीव गांधी सरकार को भी झुकना पड़ा था। किसानों ने अंग्रेजी सत्ता को भी हिला दिया था। अंग्रेजों के राज्य में भी समय-समय पर किसान आंदोलन हुए और उन्होंने ना सिर्फ स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई बल्कि अंग्रेज सत्ता के नीव को हिला कर रख दिए थे।

हालांकि स्वतंत्रता से पहले किसान आंदोलन पर गांधीजी का स्पष्ट प्रभाव देखने को मिलता था। 1857 के असफल विद्रोह के बाद विरोध का मोर्चा किसानों ने ही संभाला क्योंकि अंग्रेजी और देसी रियासतों के सबसे बड़े आंदोलन उनके शोषण से ही उपजे थे। हकीकत में देखें तो जितने भी किसान आंदोलन हुए उनमें अधिकांश आंदोलन अंग्रेजो के खिलाफ थे ।

देश में नील पैदा करने वाले किसानों का आंदोलन , पावना विद्रोह , केभागा आंदोलन , चंपारण का सत्याग्रह इनमे से प्रमुख आंदोलन मे से एक थे । इनका नेतृत्व भी महात्मा गांधी और वल्लभ भाई पटेल जैसे महान नेताओं ने किया था।

1. दक्कन का विद्रोह

इस आंदोलन की शुरुआत दिसंबर 1874 में महाराष्ट्र के सुरूर तालुका के कड़ा गांव से हुई दरअसल।
एक सूदखोर कालूराम ने किसान बाबा साहब देशमुख के खिलाफ अदालत से घर की नीलामी के आर्डर प्राप्त कर लिए। इस पर किसानों ने साहूकारों के विरुद्ध आंदोलन शुरू कर दिया। खास बात यह रही कि यह आंदोलन एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं रहा बल्कि देश के विभिन्न भागों में फैल गया।

2. एका आंदोलन

यह आंदोलन उत्तर प्रदेश में शुरू हुआ। होमरूल लीग के कार्यकर्ताओं के प्रयास तथा मदन मोहन मालवीय के मार्गदर्शन के परिणाम स्वरूप फरवरी 1918 में उत्तर प्रदेश में किसान सभा का गठन किया गया। 1919 के अंतिम दिनों में किसानों का संगठित विद्रोह खुलकर सामने आया। इस संगठन को जवाहरलाल नेहरू ने भी अपना सहयोग प्रदान किया था। उत्तर प्रदेश के हरदोई बहराइच एवं सीतापुर जिलों में , वृद्धि एवं उपज के रूप में लगान वसूली को लेकर यह आंदोलन चलाया गया था।

3. मोपला विद्रोह

मोपला विद्रोह केरल के माराबार क्षेत्र में मोपल किसानों द्वारा 1920 में किया गया था। आरंभ में यह विद्रोह अंग्रेज हुकूमत के खिलाफ था। महात्मा गांधी ,शौकत अली मौलाना, अब्दुल कलाम आजाद जैसे नेताओं का सहयोग इस आंदोलन को प्राप्त था। हालांकि 1920 में इस आंदोलन ने हिंदू मुस्लिमों के मध्य सांप्रदायिक आंदोलन का रूप ले लिया था और बाद में इसे कुचल दिया गया।

4. कूका विद्रोह

यह आंदोलन सन 1872 में पंजाब के कुकर यानी कि नामधारी सिखों के द्वारा किया गया। यह एक सशस्त्र विद्रोह था। यह विद्रोह कृषि संबंधी समस्याओं तथा अंग्रेजी सरकार द्वारा गायों के हत्या को बढ़ावा देने के विरोध में किया गया था। बालक सिंह तथा उनके अनुयाई गुरु राम सिंह ने इसका नेतृत्व किया था। कूका विद्रोह के दौरान 66 नामधारी सिख शहीद हो गए थे।

5. ताना भगत आंदोलन

लगान की ऊंची दर तथा चौकीदारी कर के विरुद्ध ताना भगत आंदोलन की शुरुआत हुई। इसे मजदूरों का भी व्यापक समर्थन प्राप्त था। 1974 में इस आंदोलन की शुरुआत बिहार से हुई थी जिसके प्रवर्तक जतरा भगत थे।

6. तेलंगाना आंदोलन

आंध्र प्रदेश में यह आंदोलन जमीदारों एवं साहूकारों के शोषण के खिलाफ 1946 को शुरू किया गया था। 1858 के बाद हुए किसान आंदोलन का रूप पहले के आंदोलन से अलग था। अब किसान बगैर किसी मध्यस्थ के स्वयं ही अपनी लड़ाई लड़ने लगे। इन के अधिकांश मांगे आर्थिक होती थी।

7. चंपारण सत्याग्रह

चंपारण सत्याग्रह यानी कि नीलगिरी, बंगाल के किसानों द्वारा सन 1859 में की गई थी। बिहार के चंपारण में किसानों से अंग्रेज बागान मालिकों ने एक अनुबंध करा लिया था, जिसके अंतर्गत किसानों को जमीन के 30% हिस्से में नील की खेती करना अनिवार्य था। जब 1917 में गांधीजी इस विषम परिस्थितियों से अवगत हुए तब उन्होंने बिहार जाने का फैसला किया। गांधीजी राजेंद्र प्रसाद के साथ बिहार गए और ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ अपना पहला सत्याग्रह प्रदर्शन किया।

8. बारदोली सत्याग्रह

सूरत के बारदोली तालुका में 1928 में किसानों द्वारा लगाना देने के लिए एक आंदोलन चलाया गया। इस आंदोलन में केवल ऊंची जातियों के भूस्वामी किसान ही नहीं अपितु सभी जनजाति के किसानों ने हिस्सा लिया था। इस आंदोलन का नेतृत्व सरदार वल्लभभाई पटेल ने किया था।

अखिल भारतीय किसान सभा

1923 में स्वामी सरस्वती ने बिहार किसान सभा का गठन किया था। 1928 में आंध्र प्रांतीय रैयत सभा का स्थापना एनजी रंगा ने किया। वहीं उड़ीसा में मालती चौधरी ने उत्कल प्रांतीय किसान सभा। स्थापना करी थी। अप्रैल 1935 में संयुक्त प्रांत में किसान संघ की स्थापना हुई।

तो ये थे भारत मे हुये अब तक के कुछ बड़े किसान आंदोलन और मुझे आशा है की आपको किसान आंदोलन से जुड़ी जानकारी पसंद आई होगी यदि आपको कोई दिक्कत है तो आप कमेंट कर सकते है और इसे सबके साथ फेस्बूक और व्हात्सप्प पर शेर जरूर करे ।

किसान आंदोलन का इतिहाश
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  1. zortilonrel Reply

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